
वाक् प्रधानसम्पादकः आचार्य विशालप्रसाद भट्ट
साहित्याचार्य एवं शिक्षाशास्त्री( बी०एड०) उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय हरिद्वार
शैक्षणिक अनुभव- मदरहुड आयुर्वेदिक मेडिकल महाविद्यालय रुडकी हरिद्वार में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में अध्यापन कार्य किया।संस्कृत सेवा-
उत्तराञ्चल संस्कृतभारती देहरादून में पूर्णकालिक के रूप में संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिये संस्कृत सेवा की।आवासीय भाषाप्रशिक्षण वर्गों संस्कृत शिक्षक प्रशिक्षण वर्गों एवं संस्कृतसम्भाषण शिबिरों में अध्यापन प्रबन्धन एवं सञ्चालन का अनुभव।
शिक्षण-प्रशिक्षण अनुभव-
राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद लखनऊ एवं जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों में संस्कृतशिक्षकों को प्रशिक्षण प्रदान किया।
शोधपत्रवाचन-
अखिल भारतीय संस्कृत शोधसम्मेलनों में पांच शोधपत्रों का वाचन एवं सत्र संयोजन तथा मञ्चसञ्चालन किया।
अन्तर्जालीय राष्ट्रिय संस्कृत कार्यशालाओं में प्रतिभाग किया।
उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान लखनऊ में संस्कृतप्रशिक्षक के रूप में कार्यरत हैं।
विशेष अभिरुचि– संस्कृत पत्रिका एवं संस्कृत समाचार पत्रों के लिये संस्कृत लेख लेखन,संस्कृत कविता लेखन,संस्कृत शोध पत्र लेखन, सस्कृत वार्ता लेखन,संस्कृत सम्भाषण,संस्कृत गीत गायन,मञ्च सञ्चालन में विशेष अभिरुचि है।

वाक् सम्पादकः डा० सुमनप्रसादभट्टः
डॉ. सुमन प्रसाद भट्ट देवभूमि उत्तराखंड में संस्कृत भाषा के प्रचार प्रसार व शिक्षण प्रशिक्षण के क्षेत्र में प्रसिद्ध नाम है।
शिक्षा – आरंभिक शिक्षा गांव में अर्जित करने के बाद आपने वर्ष 2001 में उच्च प्राथमिक शिक्षा प्राप्त की। तदुपरांत संस्कृत वांगमय का व्यापक अध्ययन एवम् अनुशीलन करने की दृष्टि से आपने श्री विश्वनाथ स्नातकोत्तर संस्कृत महाविद्यालय, उत्तरकाशी से वर्ष 2003 में पूर्व मध्यमा तथा श्री लक्ष्मण संस्कृत महाविद्यालय, देहरादून से आचार्य पर्यन्त तक कि शिक्षा 2010 में संपन्न की। आपने वर्ष 2011में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, लखनऊ परिसर, लखनऊ से शिक्षा शास्त्री (बीएड) व वर्ष 2012 में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर परिसर, जयपुर से शिक्षाचार्य (एम एड) की उपाधि प्राप्त की।
प्रशिक्षण अनुभव-
केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, भोपाल परिसर, भोपाल में वर्ष 2013 में संस्कृत शिक्षा अनुसंधान परियोजना में जे आर एफ के रूप में चयनित हो कर आपने देश के प्रख्यात विश्वविद्यालयों में संस्कृत शिक्षा में संपन्न शोध कार्यों का गम्भीर अनुशीलन किया। संस्कृत शिक्षण में नवाचारी उपागमों का गहन अनुभव के साथ ही संस्कृत संभाषण में विशिष्टता के कारण आपका चयन असिस्टेंट प्रोफेसर (संविदा) शिक्षाशास्त्र के पद पर केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, श्री रणवीर परिसर, जम्मू में वर्ष 2013 में हुआ। आपने इसी विश्वविद्यालय के एकलव्य परिसर, अगरतला त्रिपुरा में भी अपनी सेवाएं प्रदान कर पूर्वोत्तर भारत में संस्कृत भाषा के प्रचार प्रसार को बल प्रदान किया। वर्ष 2016 से आप उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार के शिक्षाशास्त्र विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में संस्कृत भाषा अध्यापकों के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
शोधपत्रवाचन- वंचित वर्ग की शिक्षा व्यवस्था पर गवेषणा करके संस्कृत में अपना शोधप्रबंध लिखकर पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है।
विशेष अभिरुचि– आपने संस्कृत भारती, देवभूमि सामाजिक शैक्षणिक उत्थान अकादमी तथा अनौपचारिक संस्कृत शिक्षण योजना के माध्यम से संस्कृत भाषा के प्रचार प्रसार में अद्वितीय योगदान प्रदान किया। आपने प्रेरणा पथ का संपादन करके संस्कृत के साथ ही उत्तराखंड के लोक जन जीवन को मुख्य धारा में लाने का प्रयास किया। आपके विभिन्न शोध जर्नल में 15 से अधिक शोधपत्र प्रकाशित हुए हैं। आपने संस्कृत तथा शिक्षा पर केंद्रित 20 से अधिक राष्ट्रीय संगोष्ठियों तथा कार्यशालाओं में प्रतिभाग किया। आपने उत्तराखंड के संस्कृत अध्यापकों को इंटरनेट, ई लर्निंग, एम लर्निंग व आधुनिक संस्कृत उपगमों के विषय में प्रशिक्षण प्रदान करके संस्कृत भाषा संवर्धन में महत्तवपूर्ण भूमिका निभाई।
सम्प्रति आप उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में अकादमिक परिषद के सदस्य होने के साथ ही अनेक समितियों के संयोजक व सदस्य हैं।

वाक् उपसम्पादकः – डा० प्रदीपः सेमवालः
शिक्षा – साहित्याचार्यः, शिक्षाशास्त्री (बी. एड), शिक्षाचार्य: (एम. एड), एम. फिल्, विद्यावारिधिः (पीएचडी) . आपने वर्ष २००४ से उत्तराञ्चल संस्कृतभारती में संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिये संस्कृत सेवा की।
2005-2006 से संस्कृतभारती के विस्तारक के रूप मे कार्य किया। आपने अनेक स्थानों पर दस दिवसीय संस्कृत सम्भाषण शिविरों का संचालन किया हैशोधपत्रवाचन- संस्कृत साहित्य में स्त्रियों का योगदान भूमिका व महत्त्व, शिक्षक शिक्षा में मूल्यों की आवश्यकता एवं महत्व, संस्कृत शिक्षण की समस्याएं व् समाधान,
संस्कृतशास्त्रीयग्रन्थो में निहित मानवीय मूल्य इत्यादि विषयों में शोधपत्र वाचन किया है।प्रशिक्षण अनुभव-
फरवरी २०१३ से अगस्त २०१५ तक कुकरेजा इन्स्टीट्यूट आफ टीचर्स एजुकेशन में शिक्षणकार्यं किया । वर्ष २०१६ से २०१७ तक नवदेहली स्थित राष्ट्रियसंस्कृतसंस्थान मे अनौपचारिकसंस्कृतशिक्षक, कानपुर में डा. राममनोहरलोहियामहाविद्यालय में , विक्रमाजीतसिंहसनातनधर्ममहाविद्यालय में , दयानन्दमहिलामहाविद्यालय में व भारतीयप्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर में संस्कृत शिक्षक के रूप में का कार्य किया। २०१७ से २०१९ तक हिमाचलप्रदेशकेन्द्रीयविश्वविद्यालय धर्मशाला में संस्कृत शिक्षण किया ।
विशेष अभिरुचि–
संस्कृत सम्भाषण शिविरों का संचालन करना व संस्कृत के प्रचार व प्रसार से जुड़े हुए कार्यो में योगदान करना आपकी विशेष अभिरूचि है










